भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी, ट्रैप कैमरों में कैद हुए बाघ-बाघिन और शावक…..
भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी, ट्रैप कैमरों में कैद हुए बाघ-बाघिन और शावक…..

शेख अज़ीज़ खान की ख़ास रिपोर्ट
भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी, ट्रैप कैमरों में कैद हुए बाघ-बाघिन और शावक…..
भोरमदेव की पहाड़ियों और घने जंगलों में बाघों की वापसी ने वन्यजीव प्रेमियों में नई उम्मीद जगा दी है।
कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभयारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में बाघ-बाघिन अपने शावकों के साथ खुलेआम विचरण कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में उनकी साफ तस्वीरें कैद हुई हैं।बाघों की मौजूदगी किसी एक दृश्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित और स्वस्थ है। बाघिनों को शावकों के साथ शिकार करते हुए भी देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि क्षेत्र में शिकार प्रजातियों की संख्या पर्याप्त है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण कई बाघ सुरक्षित और शांत आवास की तलाश में भोरमदेव की ओर आ रहे हैं। इस बार बाघिनें शावकों के साथ लंबे समय से यहीं डटी हुई हैं, जो इस क्षेत्र की उपयुक्तता को दर्शाता है।
बाघों की बढ़ती मौजूदगी के बीच वन विभाग भोरमदेव अभयारण्य में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि अप्रैल या मई से आम पर्यटकों के लिए सफारी शुरू हो जाएगी। ऑनलाइन टिकट व्यवस्था के साथ इससे स्थानीय रोजगार और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।कुल मिलाकर, भोरमदेव अभयारण्य में बाघों की वापसी ना सिर्फ वन विभाग की सफलता है, बल्कि पूरे कबीरधाम जिले के लिए गर्व का विषय भी है, यह साबित करता है कि सही संरक्षण से जंगल अपनी शान खुद लौटा लेते हैं।



