आवास निर्माण में उपयोग के लिए काटी गई 141 नग बल्ली जप्त, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
आवास निर्माण में उपयोग के लिए काटी गई 141 नग बल्ली जप्त, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

शेख अज़ीज़ खान की ख़ास रिपोर्ट
आवास निर्माण में उपयोग के लिए काटी गई 141 नग बल्ली जप्त, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
कोटा/खोंगसरा। कोटा वनमंडल के अंतर्गत ग्राम तुमाडबरा (पंचायत खोंगसरा) में वन विभाग ने अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 141 नग बल्ली (लकड़ी) जप्त की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन लकड़ियों का उपयोग आवास निर्माण कार्य में किया जाना था। मामले में वन विभाग ने वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वनग्रामों में प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए जंगलों से बड़ी मात्रा में लकड़ियां काटी जा रही हैं। शिकायतों के आधार पर विभागीय टीम ने 18 जून को ग्राम तुमाडबरा में छापामार कार्रवाई की, जहां बड़ी संख्या में बल्ली लकड़ी जमा मिली।
जप्ती के दौरान विभाग ने सागौन के 4 नग, साल के 2 नग, कारी के 2 नग बेर्री के 1 साजा के 2 नग, धौरा का 1 नग सेन्हा के 129 नग सहित विभिन्न प्रजातियों की कुल 141 नग बल्ली लकड़ी बरामद की। मौके पर लकड़ियों को जप्त कर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया।
आवास निर्माण के लिए रखी गई थी लकड़ी
वन विभाग की पूछताछ में पता चला कि लकड़ियां बजरहीन बाई बैगा के आवास निर्माण कार्य में उपयोग के लिए रखी गई थीं। पूछताछ के दौरान बताया गया कि लकड़ी इसके बाद विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ वन अपराध की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
विभागीय टीम रही मौजूद
कार्रवाई में डिप्टी रेंजर नरेंद्र बैसवाड़े, वनरक्षक कुंजबिहारी पोर्ते, शिव पैकरा, टीकाराम जायसवाल और रामकुमार सहित वन विभाग का अमला शामिल रहा। टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
वनग्रामों में कटाई पर ग्रामीणों की चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के वनग्रामों में आवास निर्माण, बाड़ी घेराबंदी तथा अन्य कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। इसके लिए आसपास के जंगलों से लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कई बार प्रभावी रोकथाम नहीं हो पाती, जिससे वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है।
वन विकास निगम पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का दावा है कि जिन क्षेत्रों से लकड़ियां काटी गई हैं, वे वन विकास निगम के अधीन जंगलों में आते हैं। आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद निगम का मैदानी अमला समय पर मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारी-कर्मचारी क्षेत्र में नियमित रूप से नहीं रहते, जिससे निगरानी प्रभावित होती है।
जांच जारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जप्त लकड़ियों के स्रोत की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि लकड़ियां किन जंगलों से काटी गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद वन अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।



