केंदा स्कूल में बड़ी लापरवाही शिक्षा विभाग में बड़ा पेपर लीक
केंदा स्कूल में बड़ी लापरवाही शिक्षा विभाग में बड़ा पेपर लीक

शेख़ अज़ीज़ खान की ख़ास रिपोर्ट
केंदा स्कूल में बड़ी लापरवाही
शिक्षा विभाग में बड़ा पेपर लीक
बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड शिक्षा विभाग में एक गंभीर लापरवाही और कथित पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के अनुसार, कोटा विकासखंड के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केंदा में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए कक्षा 11वीं का गणित विषय का पेपर निर्धारित तिथि से पहले ही करा दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार
कक्षा 11वीं का गणित पेपर दिनांक 09 अप्रैल 2026 को होना निर्धारित था।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि— उसी पेपर को 04 अप्रैल 2026 (शनिवार) को ही केंदा स्कूल में आयोजित कर दिया गया।
जबकि कोटा विकासखंड के अन्य किसी भी स्कूल में उस दिन गणित का पेपर नहीं कराया गया। क्या यह पेपर लीक का मामला है?
या फिर यह शिक्षकों की भारी लापरवाही है?
किसके आदेश से समय से पहले परीक्षा कराई गई?
क्या अन्य छात्रों के साथ अन्याय नहीं हुआ?
इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिम्मेदारों का क्या कहना है?
जब इस मामले में
प्रिंसिपल मलिंडा मिंज
लेक्चरर CR मार्को
से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि पेपर दोबारा करवा देंगे।”
लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी गलती के बाद सिर्फ दोबारा पेपर कराना ही क्या पर्याप्त है?
शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि—
शिक्षा विभाग के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं
निगरानी और नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह फेल नजर आ रही है
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है
अब जिम्मेदारी किसकी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे?
क्या दोषी शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा?
जनता की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि—इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाए निष्कर्ष
यह सिर्फ एक स्कूल की गलती नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।




